Brief history of  online business and opportunities.

आजकल का समय online business या ऑनलाइन कारोबार  का है , जैसे जैसे इंटरनेट (internet ) का प्रभाव बढ़ रहा है वैसे वैसे online business या ऑनलाइन पैसे कमाने (online money making ) का चलन भी बढ़ता जा रहा है आजकल का युवा परंपरागत तरीके से नौकरी करने के बजाय स्वयं का कोई काम करके पैसे कमाना  चाहता है।  जिससे उसकी कमाई हो तथा वह स्वावलम्बी भी बन सके। 

वैसे तो online business या online कारोबार की शुरुआत हमारे देश में पहले हो गयी थी परन्तु असली तेजी सन 2010-11 के बाद से आयी है।  शुरुआत में इस online business मॉडल के बारे में लोगो को जानकारी कम थी असल में कई सारी ठगी की घटनाऐं होने के कारण लोग सामान मंगाने में डरते थे , कई बार लोगों को सामान की जगह घास-फूस भी आ जाता था , इसके अलावा अगर गलत सामान आ गया तो उसे बदलने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। 

विश्वपटल पर देखें तो सन 1990  के बाद से ही इ-कामर्स (e-commerce ) या  online business /ऑनलाइन कारोबार की शुरुआत हो गयी थी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी अमेज़न डॉट कॉम (Amazon.com) की शुरुआत 1994 में  cadabra.inc  के नाम से हुई थी।  एक वर्ष संचालन के बाद इसके संस्थापक Jeff Bejos (जेफ बेजॉस ) ने इसका नाम अमेज़न नदी के नाम पर अमेज़न (Amazon ) रख दिया। यह कंपनी online business की दुनिया में एक सफल ई -कॉमर्स (E-Commerce ) कंपनी का पर्याय बन चुकी है और इसके संथापक दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। 

amazon.com के बाद सन 1995 में एक दूसरी कंपनी इ-बे.कॉम (ebay.com ) का उदय हुआ और ये कम्पनी भी दुनिया की सफल कम्पनियों में से एक है। 

सन 1999 में चाइना (China ) में  शुरू हुई ई -कॉमर्स (E-Commerce )  कंपनी  अलीबाबा डॉट कॉम (alibaba.com) भी एक ऐसा नाम है जो online business में शून्य से उठकर शिखर तक पहुंची है। 

पुनः  वापस लौटते हैं भारतीय ई-कॉमर्स (e-commerce) पर।  भारत में भी सन 1999  के आस पास ऑनलाइन कारोबार(online business)  ई-कॉमर्स (e-commerce) से जुड़े  पाठ्यक्रम (Courses) शुरू हो चुके थे।  हमारे यहां सन 1999 -2000  के  आस पास  फ़ोन के विकास के  साथ टेली शॉपिंग (Tele  shopping) की कंपनियां  आ चुकी थी ये कंपनियां  फ़ोन पर आर्डर (Order) लेती थीं  परन्तु इस प्रकार के काम में सामान की गारंटी संतोषजनक नहीं थी  इससे ग्राहक का विश्वास इसमें जम नहीं पा रहा था 

सन 2005  के बाद से लोग  online business या ई -कॉमर्स (E-Commerce ) को थोड़ा बहुत जानने लगे थे और भारत में भी ई -कॉमर्स (E-Commerce ) की शुरुआत हो  चुकी थी परन्तु ये सब  ज्यादातर  बड़े एवं मेट्रो  शहरों  तक ही सीमित था 

सन 2007 में भारत की  प्रमुख ई -कॉमर्स (E-Commerce ) कंपनी फ्लिपकार्ट डॉट कॉम (Flipkart.com) की शुरुआत हुई जो की हमारे ई -कॉमर्स (E-Commerce) इंडस्ट्री की प्रमुख घटना थी  फ्लिपकार्ट  ने शुरुआत किताबों से की थी परन्तु जैसे जैसे ग्राहकों की  बढ़िया प्रतिक्रिया मिलती गयी , flipkart  ने  अपनी सर्विस को  बढ़ाया  और देश की  मुख्य ई -कॉमर्स (E-Commerce) कंपनी  बन गयी। 

फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने अपनी रणनीति में ग्राहक (customer) को हमेशा प्रथम  स्थान दिया जिसका इसको फ़ायदा  भी मिला।  कैश ऑन डिलीवरी (cash on  delivery) या फिर ख़रीदे हुए माल के आर्डर  को कैंसिल  करने पर रिफंड (Refund) की सुविधा  24 के अंदर हो, ये सब फ्लिपकार्ट ने ही शुरू किया। 

भारत में सन 2007 से 2012 के बीच बहुत सारी ई -कॉमर्स (E-Commerce ) कंपनियाँ आयीं इनमें प्रमुख रहीं 

1 – Snapdel.com  2 – Shopclues  3- Paytm  4- Yebhi.com  5- Traders.com इत्यादि। 

ये  तो कुछ नाम हैं इसके अलावा सैकड़ों कंपनियां या कहे हज़ारों  की संख्या में ई -कॉमर्स (E-Commerce ) कंपनियां प्रतिदिन मार्केट में आती  गयीं परन्तु इनमे से ज्यादातर  समय के साथ बंद होती  चली गई।  इसका कारण यह है की ई -कॉमर्स (E-Commerce ) कंपनी स्टार्ट करना  आसान है परन्तु उसे आगे  ले जाकर अपना मुनाफा बनाये  रखना बहुत ही मुश्किल है , इस काम में जो माहिर रहा  और समय के साथ अपनी रणनीति  को मांजता रहा वह आज भी मुनाफा कमा कर दौड़ में  आगे बना हुआ है। 


Online(ई -कॉमर्स ) बिज़नेस को शुरू कैसे करें ?

How  to start online selling in e-commerce  ?

सन 2010 के बाद से भारतीय online business/ई -कॉमर्स (E-Commerce ) बाजार में जो तेजी आयी वह 2019  तक आते  आते  काफी ज्यादा कठिन कॉम्पिटिशन (Tough competition) में बदल चुकी है  भारतीय ई -कॉमर्स (E-Commerce ) में तेजी  का एक प्रमुख कारण इंटरनेट की स्पीड , सुविधा , और इसका महंगा या सस्ता होना भी रहा है  

 वर्ष 2016 से पहले जब तक Jio कंपनी का पदार्पण नहीं हुआ था  तब इंटरनेट पैक बहुत महंगा था करीब 1GB  डाटा  रु 250  में पड़ता था।  परन्तु जब से रिलायंस की जिओ(Jio) कम्पनी मार्किट में आयी तो उसकी रणनीतिक सफलता ने इंटरनेट पैक (Internet Pack) के दाम काम कर दिए।  इससे भारतीय बाजार को ये फायदा हुआ की हर नागरिक को इंटरनेट की सुविधा हर समय (anytime) , बहुत ही कम पैसो में उपलब्ध रहने लगी।  जब लोगों के मोबाइल में इंटरनेट (internet ) रहने लगा तो लोगों ने  ज्यादा समय इंटरनेट पर बिताना आरम्भ कर दिया और अपने आप ही ई -कॉमर्स (E-Commerce ) की पंहुच भारत के छोटे शहरों और कस्बों में होने लगी।  यह उस समय की याद दिलाता है जब वर्ष 2001-02  के समय रिलायंस ने रु 501 में हर गरीब या अमीर के हाथ मोबाइल उपलब्ध करा दिया था। इसमें कुल मिलाकर फायदा ग्राहक को ही हुआ। 

भारतीय ई -कॉमर्स (E-Commerce ) अपने 10 वर्ष सक्रियता से पूरे कर चुका है अब यह वो खुला मैदान नहीं रह गया है जहाँ कोई भी नया खिलाड़ी आ कर खूंटा गाड़ दे  और उसकी दुकान चल निकले।  अमेरिका और यूरोप की भांति यहां भी मार्केट अब धीरे-धीरे  एक संकरे (Narrow) पथ की ओर बढ़ रही  है अब  विशेष सेगमेंट (specific segment) की ओर मार्केट का झुकाव ज्यादा है इसे मार्केटिंग की भाषा में नीश मार्केटिँग (Niche Marketing ) कहते हैं मतलब यह है की उपभोक्ता सामानो (consumer goods) के सभी सेगमेंट को टारगेट (target) न करके एक  निश्चित वर्ग  को निशाना बनाना। 

एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाले सामान –

1 – कपडे (Apparel)

2 – इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) 

3 – सॉफ्टवेयर (Software)

4 – किताबें (Books)

5 – मोबाइल फ़ोन्स (Mobile Phones)

6 – मेकअप (Makeup)    

7 – लेडीज बैग्स (Ladies Bags), इत्यादि।

  • वर्ष 2021 तक आते आते पूरी दुनिया के कुल रिटेल  सेल्स  (Retail sales) का करीब 17.5 % सेल्स केवल online business या ई -कॉमर्स (E-Commerce ) से आएगा।  
  • भारतीय ई -कॉमर्स (E-Commerce ) मार्किट सन 2020 तक करीब 850 बिलियन (8 हज़ार 5 सौ करोड़ ) का हो जायेगा। 

ई -कॉमर्स (E-Commerce ) या online business के बढ़ोतरी (growth ) के साथ  कूरियर (courier), पैकिंग मटेरियल (packing material ) कॉल सेंटर (call center ), डिलीवरी (delivery boy ) आदि की भी आवश्यकता बढ़ रही है जिससे प्रत्यछ या अप्रत्यछ रूप से कई सारे रोजगार के अवसर भी उपलब्ध   हो रहें है अंतः आवश्यकता है की हम आने वाले अवसरों के लिए जागरूक रहें , उनकी जानकारी रखें और अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार उनका फायदा उठाएं। 


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